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सुभाष कांडपाल


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अति सर्वत्र वर्जयेत्

Posted On: 19 Jun, 2013  
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निर्मल बाबा vs कॉरपोरेट बाबा

Posted On: 16 Apr, 2012  
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समय २१वी सदी का

Posted On: 11 Mar, 2012  
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कितना सुन्दर होता ये जीवन

Posted On: 6 Feb, 2012  
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मां

Posted On: 3 Feb, 2012  
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जन लोकपाल तो पास करा दो

Posted On: 9 Dec, 2011  
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दिग्विजय सिंह जी से ३ प्रश्न

Posted On: 11 Oct, 2011  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

सच कहा सुभाषजी. वास्तवमे देखा जाय तो हमारे हिन्दू समाजकी यह एक दयनीय स्थिति है जिसमे माता पिता ही अपनी पहचान गँवा चुके है. पूर्वकी और देखकर सुबहमें नमस्कार करने वाले हम लोग अब पश्चिम की और दंडवत प्रणाम करने लगे है. हमें यदि आधुनिक दिखाना है तो हमारी परंपराओंको नष्ट करना होगा. यही रवैया हो गया है. ज्ञान को सर्वोच्च मानने वाली हमारी संस्कृति को कदाचित कल का ग्रहण लग गया है. इसमे हमारी शिक्षा प्रणालिका भी दोष है जो कि हमें अंग्रेजी नज़रियेसे हमारी संस्कृति देखनेको मजबूर कराती है. हमारी सरकारोंको इन बातोंसे कोई सरोकार नहीं है क्यूंकि वे जानते है और मानते है कि हिंदुओं के अंदर सहिष्णुता है और वोही उनकी कमज़ोरी है. वास्तवमे हमें आवश्यकता है एक वैचारिक और सांस्कृतिक नव निर्माण की. एक आंदोलनकी.

के द्वारा: shriguruji shriguruji

के द्वारा: सुभाष कांडपाल सुभाष कांडपाल

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प्रिय सुभाष मेरा भी यही विचार है-----"श्रध्ये बाबा राम देव : बाबाजी ने कहा है की उनसे भी किसी नेता ने न्यासो में मदद करने के लिये दो करोड रुपये की रिश्वत की मांग की थी ( साथ ही आचार्य बाल किशन जी ने आगे बढ कार यह भी कह दिया की वह व्यक्ती आज भी उत्तराखंड सरकार में मंत्री है ) क्योंकी श्रध्ये बाबा राम देव भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक मुहीम चला रहे है और देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिये एक नेक काम कार रहे है तो उन्हे जनता को यह बताना ही होगा की वह कौन स व्यक्ती है जिसने दो करोड की मांग की थी - क्योंकी रिश्वत एक ऐसा कडवा सच है की " इस हाथ ले उस हाथ दे " बाबाजी द्वारा तीन ट्रस्ट अस्तित्व लायी गई है (१) दिव्या योग पीठ मंदिर ट्रस्ट (२) पतंजली योग पीठ ट्रस्ट (३) भारत सावभिमान ट्रस्ट इनमे से अगर केवल पतंजली योग पीठ ट्रस्ट की बात करे तो इसकी सदस्यता निम्न प्रकार से है 1- Corporate member 11,00,000/- 2-Founder member 5,00,000/- 3- Patron member 2,50,000/- 4- Life member 1,00,000/- 5- Dignified member 51,000/- 6-Respected member 21,000/- and 7- General Member 11,000/-   ------ "अब यह तो एक कटु सत्य है की कोई भी व्यक्ति अपनी आय का एक रुपया भी किसी को नहीं दे सकता अगर इतने बड़े -बड़े दान देगा तो उससे कोई फायदा भी अवश्य ही उठाएगा सारा का सारा खेल काली कमाई को सफ़ेद करने का खेल है , भारत में मान्यता प्राप्त ट्रस्ट को दान देने पर आयकर में धारा ८० जी के अंतर्गत टेक्स से छुट मिलती है यह खेल इसी लिए किया जाता है अन्यथा दानी लोग बिना नाम किये बाला जी, लाल बाग़ के देवता , साईं बाबा मंदिर में करोडो का दान देते है पर अपना नाम भी नहीं बताते ? अत: बाबा जी को यह अवश्य बताना चाहिए की जिन ट्रस्ट को मान्यता मिल चुकी है उनमे कितनी रिश्वत दी थी ? " अब यह तो देश के धर्मचारियों शंकराचारियों पर ही निर्भर है की वह ऐसे कार्पोरेट सन्यासी को किस प्रकार का सन्यासी मानते है या अब वह सन्यासी कहलाने के हक़ दार भी हैं या नहीं - एक ओर आयुर्वैदिक दवाओं का कार्पोरेट कारोबार दूसरी ओर राजनीती और तीसरी ओर जैड श्रेणी की सुरक्षा से लैश यह कैसा संन्यास -- यह ढोंग इस भारत देश में ही संभव है ---- आपके साहस को प्रणाम ----

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